मैं एक सफर हूँ......
मैं एक सफ़र हूँ , जो कभी भटक सकता नहीं ,
अब कर्म करने से , मेरा ईमान थक सकता नहीं ,
न हवा से तेज़ , न घड़ी से धीमे,
संग चल रहा हूँ सत्य लेकर ,
अब मंज़िल से ध्यान हट सकता नहीं ,
मैं एक सफ़र हूँ ,जो कभी भटक सकता नहीं.......
संघर्षों के सहारे बढ़ रहा हूँ ,
इस ज़माने का प्रहार मुझे डगा सकता नहीं ,
हाँ मैं भी झुकता हूँ ,
छोड़ उम्मीदें देता हूँ,
पर जैसे पानी के आक्रोश को ,
कोई हरा सकता नहीं ,
मैं भी एक सफर हूँ , जो कभी भटक सकता नहीं ,
कभी भटक सकता नहीं ........

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