अब बढ़ तू , आगे चल तू .......
अब बढ़ तू , आगे चल तू ,
ये मात वो काली रात नहीं
झूठा है तू , टूटा है तू
तेरे हँसने में अब वो बात नहीं
नज़रे तो खुदसे मिला तू
तू खुद ही है जो तेरे साथ नहीं
उम्मीद है तू , उजाला है तू
मत चुन निराशा , ये तेरे पास नहीं
दूजे के दुःख में दुखी है तू
जिनके दिल में बची कोई आस नहीं
तू सहारा उनका , अब किनारा है तू
मत बोल की खुद पे विश्वाश नहीं
उठ जा , अब लड़ जा तू
ये जीत की पहली सीढ़ी वो हार नहीं
अब बढ़ तू , आगे चल तू ,
ये मात वो काली रात नहीं........
अब बढ़ तू , आगे चल तू ,
ये मात वो काली रात नहीं
झूठा है तू , टूटा है तू
तेरे हँसने में अब वो बात नहीं
नज़रे तो खुदसे मिला तू
तू खुद ही है जो तेरे साथ नहीं
उम्मीद है तू , उजाला है तू
मत चुन निराशा , ये तेरे पास नहीं
दूजे के दुःख में दुखी है तू
जिनके दिल में बची कोई आस नहीं
तू सहारा उनका , अब किनारा है तू
मत बोल की खुद पे विश्वाश नहीं
उठ जा , अब लड़ जा तू
ये जीत की पहली सीढ़ी वो हार नहीं
अब बढ़ तू , आगे चल तू ,
ये मात वो काली रात नहीं........

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